भारतीय ज्ञान परम्परा सहस्त्राब्दियों से मानवता को मार्गदर्शन देती रही है। वेदों, उपनिषदों, पुराणों, आचार्य परम्परा और विविध दार्शनिक धाराओं ने न केवल ज्ञान का संवर्धन किया, बल्कि जीवन के प्रत्येक आयाम को संतुलित करने की दृष्टि भी प्रदान की। यह परम्परा केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यवहार, संस्कृति और सामाजिक संगठन में भी गहराई से रची-बसी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इसी अमूल्य परम्परा को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने का प्रयास करती है। यह नीति शिक्षा को केवल रोजगारपरक बनाने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे मूल्यपरक, समग्र और जीवनोपयोगी बनाने पर बल देती है। भारतीय ज्ञान परम्परा के आलोक में यह नीति विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, सृजनशील और वैश्विक नागरिक बनाने की दिशा में अग्रसर करती है।पहला अध्याय अनिता बगड़िया द्वारा भारतीय ज्ञान परम्परा, समाज और व्यक्तित्व विकास विषय पर लिखा गया है जिसमें यह बताया गया है कि हमारे वेद, उपनिषद, योग, आयुर्वेद एवं दर्शनशास्त्र हमारी बौद्धिक विकास के साथ-साथ नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक उत्थान में सहायक होते हैं। दूसरा अध्याय बुद्धराम जाखड़ द्वारा भारतीय ज्ञान परम्परा (आई. के. एस.) और आधुनिक शिक्षा विषय पर लिखा गया गया है।